मार्को और जादुई महल

A tale created with Taleomatic

Illustration for scene 1
शूरवीर मार्को एक बड़े महल के दरवाज़े पर खड़ा था। महल में ऊँची-ऊँची मीनारें थीं जिन पर झंडे हवा में लहरा रहे थे। पत्थर चाँदनी में ऐसे चमक रहे थे जैसे उन पर छोटे-छोटे हीरे जड़े हों। मार्को ने अपनी लकड़ी की तलवार कसकर पकड़ी और गहरी साँस ली। वो एक बहादुर शूरवीर था, और बहादुर शूरवीर हमेशा आगे बढ़ते हैं। मार्को ने भारी दरवाज़ा धकेला और अंदर चला गया। महल जादू से भरा हुआ था! मोमबत्तियाँ बिना किसी के पकड़े हवा में तैर रही थीं। दीवारों पर लगी तस्वीरें पलकें झपका रही थीं और उसे देखकर मुस्कुरा रही थीं। एक कालीन अपने आप उसके पैरों के नीचे बिछ गया, जैसे कह रहा हो "इधर आइए।" मार्को हँस पड़ा। यह सबसे अद्भुत जगह थी जो उसने कभी देखी थी।
Illustration for scene 2
तभी मार्को को एक छोटी सी आवाज़ सुनाई दी। यह एक बड़े सुनहरे पर्दे के पीछे से आ रही थी। उसने पर्दा हटाया और कोने में एक छोटा हरा ड्रैगन बैठा पाया। ड्रैगन के छोटे बैंगनी पंख थे और बड़ी-बड़ी नारंगी आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं। "डरो मत," मार्को ने धीरे से कहा। "मैं मार्को हूँ। तुम्हारा नाम क्या है?" छोटे ड्रैगन ने सुड़क कर कहा, "मैं चिंगारी हूँ।" "ऊपर मीनार में कुछ है," चिंगारी ने काँपते हुए पंजे से ऊपर इशारा करते हुए फुसफुसाकर कहा। "रात को अजीब आवाज़ें आती हैं। धम-धम, सर-सर और छन-छन की आवाज़ें। मुझे इतना डर लगता है कि देखने नहीं जा पाता।" चिंगारी अपने छोटे पंखों के पीछे छिप गया। मार्को ने ऊपर अँधेरी सीढ़ियों को देखा जो घूमती हुई मीनार तक जा रही थीं।
Illustration for scene 3
मार्को का पेट गुड़-गुड़ कर उठा। सीढ़ियाँ अँधेरी थीं और आवाज़ें डरावनी लग रही थीं। उसके मन का एक हिस्सा भी छिपना चाहता था। लेकिन फिर उसने छोटे चिंगारी को देखा, काँपते और डरे हुए, और मार्को को पता चल गया कि उसे क्या करना है। "बहादुर होने का मतलब यह नहीं कि डर न लगे," मार्को ने चिंगारी से कहा। "बहादुर होने का मतलब है कि डर लगने पर भी आगे बढ़ो।" मार्को ने अपना हाथ बढ़ाया। "मेरे साथ चलो," उसने कहा। "हम साथ मिलकर बहादुर बनेंगे।" चिंगारी ने मार्को के हाथ को देर तक देखा। फिर छोटे ड्रैगन ने अपना नन्हा पंजा बढ़ाकर कसकर पकड़ लिया। साथ मिलकर, एक-एक कदम, वे घुमावदार सीढ़ियाँ चढ़े। मोमबत्ती की रोशनी में उनकी परछाइयाँ दीवारों पर नाच रही थीं।
Illustration for scene 4
मीनार के सबसे ऊपर उन्हें एक गोल कमरा मिला जो टिमटिमाती रोशनियों से भरा था। और वहाँ, कमरे के बीच में, एक नन्हीं परी तैर रही थी — चाँदी के बाल और चमकते पंख। वो छोटी-छोटी घंटियों से करतब दिखा रही थी — यही थी वो छन-छन की आवाज़! जब उसने उन्हें देखा, तो ताली बजाकर बोली, "अरे वाह! मेहमान! मैं इस महल की परी माँ हूँ। मैं किसी बहादुर इंसान का इंतज़ार कर रही थी जो मुझे ढूँढ सके!" परी माँ ने मार्को और चिंगारी पर चाँदी की धूल छिड़की। पूरी मीनार हल्की सुनहरी रोशनी से भर गई। "तुम दोनों बहुत बहादुर थे," उसने गर्मजोशी से मुस्कुराते हुए कहा। चिंगारी ने खुशी से एक छोटी सी लौ फूँकी, और उसके सारे आँसू ग़ायब हो चुके थे। मार्को एक बड़े मखमली गद्दे पर बैठ गया। चिंगारी उसके बगल में सिमट गया, एक छोटी अँगीठी जैसा गरम। परी माँ ने एक मीठी लोरी गुनगुनाई, और घंटियाँ धीमे-धीमे बजती रहीं। मार्को मुस्कुराया, गर्माहट और गर्व महसूस करते हुए, और धीरे-धीरे, प्यार से, नींद में खो गया।

Create a story like this for YOUR child

Their face will appear in every illustration

Start Creating Stories